TestoZara Si Aahat

Lata Mangeshkar

Ultima modifica il: 2 luglio 2017
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ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं

कहीं ये वो तो नहीं। ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं। छुप के सीने में, आआआ.! छुप के सीने में कोई जैसे सदा देता है। शाम से पहले दिया दिल का जला देता है है उसी की ये सदा है उसी की ये अदा। कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं। शक्ल फिरती है, हाँ.! शक्ल फिरती है निगाहों में वोही प्यारी सी मेरी नस-नस में मचलने लगी चिंगारी सी छू गई जिस्म मेरा किसके दामन की हवा कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं। ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं।

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Sincronizzato daVineet Kumar Singh
Tradotto daManmohan Kumar

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