LetraShaam Se Ankh Mein

Jagjit Singh

Última actualización realizada el: 25 de julio de 2019
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शाम से आँख में नमीं सी है आज फिर आप की कमी सी है दफ़्न कर दो हमें के साँस मिले नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है आज फिर ... वक़्त रहता नही कहीं टिककर इसकी आदत भी आदमी सी है आज फिर ... कोई रिश्ता नही रहा फिर भी एक तसलीम लाजमी सी है आज फिर ...

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