LetraEk Purana Mausam Lauta

Jagjit Singh, Gulzar

Última actualización realizada el: 1 de julio de 2019

एक पुराना मौसम लौटा एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी

एक पुराना मौसम लौटा याद भारी पुरवाई भी ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तन्हाई भी एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी यादों की बौछारों से जब पलके भीगने लगती है यादों की बौछारों से जब पलके भीगने लगती है कितनी सौंधी लगती है तब कितनी सौंधी लगती है तब मांझी की रुसवाई भी एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी दो दो शकलें दिखती हैं, इस बहके से आईने में दो दो शकलें दिखती हैं, इस बहके से आईने में मेरे साथ चला आया है मेरे साथ चला आया है आपका इक सौदाई भी ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तन्हाई भी खामोशी का हासिल भी, इक लंबी सी खामोशी है खामोशी का हासिल भी, इक लंबी सी खामोशी है उनकी बात सुनी भी हमने उनकी बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तन्हाई भी एक पुराना मौसम लौटा एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी

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